कुछ तुने दिए थे
कुछ मेरे अपने थे
अब दर्द नही रहा
ज़ख्म वह भर गए
निशां भी मिट गए
तडपा था मैं कभी
अब दर्द नही रहा
कुछ तुने दिए थे
कुछ मेरे अपने थे
अब दर्द नही रहा
चाहता मैं भुलाना मगर
जेहेन मे बसा था मगर
सम्भाला ख़ुदको मैंने
दर्द मे अब तलक
अब दर्द नही रहा
कुछ तुने दिए थे
कुछ मेरे अपने थे
अब दर्द नही रहा
ना पुछूंगा ख़ुद से
ना पुछूंगा तुझ से
सवाले बेरुख़ी का
हालात से सिखा हूँ
मैं संभल चुका हूँ
अब दर्द नही रहा
कुछ तुने दिए थे
कुछ मेरे अपने थे
अब दर्द नही रहा
रेहने दो दोस्ती भी
यह रिश्ता है मेहंगा
दिल से जो कंगाल हो
दोस्ती ख़ाक निभाओगे?
तन्हा ही ख़ुश हूँ
अब दर्द नही रहा
कुछ तुने दिए थे
कुछ मेरे अपने थे
अब दर्द नही रहा
Sunday, September 26, 2010
Wednesday, September 1, 2010
छायाँ
उज्यालोमा ,
छायाँ बन्छ शरीर
अनिश्चित आकार हुन्छ
विराट हुन्छ रूप पनी
तुक्ष रति हुन्छ फेरि
कालो छायाँ फैलिदै टाढा
भयावह देखिन्छ काया
डल्लो सानो, आकार घटी
हुन्छ टाउको खुट्टा मुनि
आफ्नो छायाँ कति प्यारो
सुम्सुम्याई हर घडी
भाग्न बाद्धय तुल्याई दिने
त्यों अन्धकार निर्मोही
विचरो ! विवश !
प्रकाश छैन लुक्न गयो
शरीर पनि तड्पिरह्यो
छ्टपट आत्मा भावबिह्वल
ज्योतिसंगै विलीन भयो
झुल्केला के ! अब फेरि ?
छायाँले साथ छोड़ी
अन्धकार मै रुन्गिरह्यो
अर्ध जिवीत शरीर बनी
छायाँ बन्छ शरीर
अनिश्चित आकार हुन्छ
विराट हुन्छ रूप पनी
तुक्ष रति हुन्छ फेरि
कालो छायाँ फैलिदै टाढा
भयावह देखिन्छ काया
डल्लो सानो, आकार घटी
हुन्छ टाउको खुट्टा मुनि
आफ्नो छायाँ कति प्यारो
सुम्सुम्याई हर घडी
भाग्न बाद्धय तुल्याई दिने
त्यों अन्धकार निर्मोही
विचरो ! विवश !
प्रकाश छैन लुक्न गयो
शरीर पनि तड्पिरह्यो
छ्टपट आत्मा भावबिह्वल
ज्योतिसंगै विलीन भयो
झुल्केला के ! अब फेरि ?
छायाँले साथ छोड़ी
अन्धकार मै रुन्गिरह्यो
अर्ध जिवीत शरीर बनी
Tuesday, August 17, 2010
मेरो इन्द्रधनुष
मेरो इन्द्रधनुष दुई रंगको
कालो सेतो अचम्मको
भावनाको सागरबाट
स्वप्नको आकाश सम्म
अहा! कति प्यारो छ
जीवनको दुई पाटो
हर्ष र बिस्माद संगै
जे हेर्दछु त्येही देख्दछु
त्येसैले म हाँस्दछु
आँखा चिम्ले अँध्यारै हो
खोलेर उज्यालो चुम्दछु
मेरो इन्द्रधनुष दुई रंगको
कालो सेतो अचम्मको
कालो सेतो अचम्मको
भावनाको सागरबाट
स्वप्नको आकाश सम्म
अहा! कति प्यारो छ
जीवनको दुई पाटो
हर्ष र बिस्माद संगै
जे हेर्दछु त्येही देख्दछु
त्येसैले म हाँस्दछु
आँखा चिम्ले अँध्यारै हो
खोलेर उज्यालो चुम्दछु
मेरो इन्द्रधनुष दुई रंगको
कालो सेतो अचम्मको
Tuesday, July 27, 2010
अभी और जीना है
तेरी याद में मैखाने में.. पेहेरों बैठा करते हैं , तो क्या हुआ गर पिना छोड़ दिया , गमे जिंदगी अभी और जीना है ....अभी और जीना है
Wednesday, April 28, 2010
मन चंचल
अविरल कहिंसे जलधारा
बनके नदी है बेहेती
मन चंचल न सुख पावे
हरपल मो से है केहती
कभी बावंरिसी भंवर मे
गोता खूब लगाए
उभरके फिर किनारा
पटवार भी न पहुँचाए
मनका सागर है गेहरा
गेहराई समझ न आवे
जो समझूँ मैं मनको
मन फिर भी न समझे
बनके नदी है बेहेती
मन चंचल न सुख पावे
हरपल मो से है केहती
कभी बावंरिसी भंवर मे
गोता खूब लगाए
उभरके फिर किनारा
पटवार भी न पहुँचाए
मनका सागर है गेहरा
गेहराई समझ न आवे
जो समझूँ मैं मनको
मन फिर भी न समझे
Saturday, February 27, 2010
Tuesday, February 23, 2010
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